स्व. सत्यप्रकाश थपलियाल: निर्बलों की आशा का प्रतीक, एक श्रद्धांजलि
The post स्व. सत्यप्रकाश थपलियाल – निर्बलों की उम्मीद को सादर नमन appeared first on Avikal Uttarakhand. एक विनम्र श्रद्धांजलि- पार्थसारथि थपलियाल अविकल उत्तराखण्ड कोटद्वार। शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सत्य प्रकाश थपलियाल लंबी बीमारी के बाद बैकुंठ धाम की यात्रा पर चले गए। 24 जुलाई 2026 को… The post स्व. सत्यप्रकाश थपलियाल – निर्बलों की उम्मीद को सादर नमन appeared first on Avikal Uttarakhand.
स्व. सत्यप्रकाश थपलियाल: निर्बलों की आशा का प्रतीक, एक श्रद्धांजलि
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कम शब्दों में कहें तो, सत्यप्रकाश थपलियाल का योगदान शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट था। उनका निधन प्रशंसा और श्रद्धा के साथ याद किया जाएगा।
कोटद्वार, 26 जुलाई 2026: शिक्षाविद और समाज सेवा के प्रति समर्पित, स्व. सत्य प्रकाश थपलियाल का निधन लंबी बीमारी के बाद हुआ। उनका जीवन मात्र 86 वर्ष का रहा, लेकिन इस अवधि में उन्होंने समाज के चहारदीवारी को पार कर हर वर्ग के लिए उम्मीद जगाई। उनके निधन की खबर 24 जुलाई को रात साढ़े दस बजे सफदरजंग अस्पताल में उनकी हृदयगति में अवरोध के चलते मिली।
शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। सत्य प्रकाश जी लंबे समय से अपनी संस्कारात्मक बेटी चन्द्रिका जोशी और दामाद आर.के. जोशी के साथ दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे थे। उनके निधन से कोटद्वार जैसे छोटे शहर में शोक की लहर दौड़ गई है। यहाँ तक कि, शहर के लोग उनके बिना मौन हैं, और उनके योगदान को याद कर रहे हैं।
निर्बलों के सहारा: सामाजिक कार्य
सत्यप्रकाश थपलियाल ने उत्तराखंड में न केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही काम नहीं किया, बल्कि वे गरीब और अनाथ बच्चों के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान करते थे। उन्होंने उत्तराखंड साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच की स्थापना की, जहाँ उन्होंने कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। उनकी मेहनत के फलस्वरूप, उन्होंने सालाना कई बच्चों की आर्थिक मदद जुटाई, जिसकी किम्मत एक साल में सौ हजार रूपये से अधिक रही।
उनकी प्रेरणादायक कहानी ज्वालपा धाम संस्कृत विद्यालय से जुड़ी है। उन्होंने वहाँ छात्रों के लिए नि:शुल्क भोजन व्यवस्था को लागू करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने अपने संपर्कों के माध्यम से आर्थिक मदद प्राप्त की, जिससे कि विद्यालय में सभी बच्चों को भोजन मिल सके। यह व्यवस्था आज भी जारी है।
शिक्षा की पहचान: एक शिक्षक के रूप में
सत्यप्रकाश जी का जन्म 1936 में पौड़ी गढ़वाल में हुआ। उनके पिता महान विद्वान, महात्मा रामरत्न थपलियाल थे। उन्होंने 1972 से 1998 तक शिक्षकीय सेवा में कार्य किया और इसके बाद समाज सेवा में जुट गए। उनके कार्यों के लिए उन्हें स्वामी विवेकानंद, डॉ. राधाकृष्णन और विनोबा भावे की शिक्षाओं ने प्रेरित किया।
उनकी विदाई के समय कोटद्वार में उनके प्रशंसा और श्रद्धा के साथ विदाई दी गई। 26 जुलाई को हरिद्वार के चंडीघाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। यह सच है कि उनके जाने से निर्बलों की उम्मीदों का एक दरवाजा आज बंद हो गया है।
सत्य प्रकाश थपलियाल के निधन ने हमें यह याद दिलाया है कि जब एक संवेदनशील व्यक्ति चला जाता है, तो समाज निराश हो जाता है। उनके जीवन ने हमें यह सिखाया कि "सेवा ही मानव धर्म है" यह एक सच्चाई है, जिसे हमें जीवित रखना चाहिए।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को वैकुण्ठ लोक में स्थान दें। ॐ शांति। शांति। शांति।
बड़े गौर से सुन रहा था जमाना, तुम ही सो गए दास्ताँ कहते कहते।।
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सादर,
टीम हक़ीकत क्या है, साक्षी तिवारी
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