पति की अंतिम इच्छा: जापान से उत्तराखंड, जहां विसर्जित हुई अस्थियां
BAGESHWAR: भारत में नदियों को मां का दर्जा दिय गय है, शायद इसीलिए मृत्यु के बाद नदियों में अस्थियां विसर्जित करने की परंपरा रही है। लेकिन सिर्फ भारतीय ही नहीं, विदेशी लोग भी इस भारतीय परंपरा से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसा ही एक मामला बागेश्वर से सामने आया है, जहां जापान की एक महिला […] The post सात समंदर पार से उत्तराखंड खींच लाई पति की अंतिम इच्छा, जहां बिताए खास पल वहीं विसर्जित की पति की अस्थिया appeared first on Devbhoomi Dialogue.
पति की अंतिम इच्छा: जापान से उत्तराखंड, जहां विसर्जित हुई अस्थियां
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कम शब्दों में कहें तो, यह एक भावुक कहानी है जिसमें एक जापानी महिला ने अपने पति की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए बागेश्वर के सरयू नदी तक की यात्रा की। यह घटना भारतीय पौराणिक परंपरा की गहराई को दर्शाती है और यह भी बताती है कि कैसे विदेशियों ने भी इस परंपरा को अपनाया है।
BAGESHWAR: भारत के विभिन्न हिस्सों में नदियों को मां का दर्जा दिया गया है। शायद इसीलिए मृत्यु के बाद उनकी अस्थियों को इन नदियों में विसर्जित करने की परंपरा है। हाल ही में, एक जापानी महिला मियाको केटलेट ने अपने पति रॉबर्ट केटलेट की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए बागेश्वर की यात्रा की और सरयू नदी में उनके अस्थियों का विसर्जन किया।
गुरु की उपस्थिति में विधिपूर्वक विसर्जन
यह घटना बागेश्वर के सरयू तट की है, जहां मियाको ने अपने पति की अस्थियों को लेकर पहुंचीं। वहां एक जापानी धर्म गुरु ने विधि-विधान के साथ पूजा अर्पित की और मंत्रोच्चारण के बीच मियाको ने अपने पति की अस्थियों को सरयू की पवित्र धारा में प्रवाहित किया। उनकी यह यात्रा न सिर्फ पति की याद को संजोने की थी, बल्कि भारतीय संस्कृति का भी मान सम्मान करने का एक प्रयास था।
रॉबर्ट का भारतीय संस्कृति से लगाव
रॉबर्ट केटलेट मूल रूप से अमेरिका के निवासी थे और वहां अंग्रेजी के प्रोफेसर थे। उनकी मियाको से पहली मुलाकात 2005 में एक योग साधना शिविर के दौरान हुई थी। उस समय मियाको भी जापान में अंग्रेजी की प्रोफेसर थीं। धीरे-धीरे यह परिचय गहरी दोस्ती और फिर प्यार में बदल गया। मियाको ने रॉबर्ट को जापान आने का न्योता दिया, और 2007 में वैवाहिक बंधन में बंधने के बाद रॉबर्ट जापान चले गए।
बागेश्वर का पहला दौरा
रॉबर्ट ने पहली बार 2007 में अपनी पत्नी मियाको के साथ बागेश्वर का दौरा किया था। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और सरयू नदी से उनका गहरा जुड़ाव हो गया था। रॉबर्ट का जीवन 2022 में लंबी बीमारी के बाद समाप्त हो गया, लेकिन उनकी अंतिम इच्छा ने मियako को बागेश्वर लौटने के लिए प्रेरित किया, जहां वे अपने पति की अस्थियां विसर्जित करना चाहती थीं।
समाज पर प्रभाव
हरिद्वार आमतौर पर अस्थि विसर्जन के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है, लेकिन अब बागेश्वर की सरयू नदी भी देश-विदेश के लोगों की आस्था का केंद्र बन रही है। यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत कहानी है, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई और इसके प्रति सम्मान को भी दर्शाती है। देव भूमि की इस पवित्रता ने ही मियाको और उनके पति रॉबर्ट के बीच के रिश्ते को और भी गहरा बना दिया।
रॉबर्ट की अंतिम यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय परंपरा न केवल भारतीयों के लिए बल्कि विदेशियों के लिए भी प्रेरणादायक है। यह उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति की अंतिम इच्छा उसकी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी हो सकती है, चाहे वह कितनी भी दूर क्यों ना हो।
इस कहानी ने यह दिखाया है कि हम सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और प्रेम एवं सम्मान की मात्रा किसी भी दूरी को पार कर सकती है।
इस घटना ने यह भी सिद्ध किया कि रिवाज और परंपराएँ केवल एक देश की विशेषता नहीं हैं, बल्कि वे मानवता को जोड़ने का कार्य करती हैं।
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सादर, टीम हकीकत क्या है (नीता शर्मा)
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