देहरादून: बच्चों ने हरेला अभियान में क्लाइमेट चेंज के प्रति जागरूकता बढ़ाई, गौरैया और लाल बासमती की घटती संख्या पर चिंता

धाद के हरेला अभियान के अंतर्गत दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में “क्लाइमेट चेंज-बच्चों की नजर से” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जहां स्कूल बच्चों ने सूक्ष्म स्तर पर अपने घर,आस पड़ोस व इलाके में विभिन्न माध्यमों की जांच पड़ताल की जैसे पेड़ पौधे,जीव जंतु,फसलें एवं आपदा,और इसका असर वैश्विक स्तर पर होने वाले क्लाइमेट […] The post Dehradun:-धाद के हरेला 26 में बच्चों ने अपनी नजर से बताया क्लाइमेंट चेंज को कहा-देहरादून में अब गौरय्या कम दिखती है,लाल बासमती हो गया है गायब   appeared first on संवाद जान्हवी.

Aug 8, 2026 - 09:39
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देहरादून: बच्चों ने हरेला अभियान में क्लाइमेट चेंज के प्रति जागरूकता बढ़ाई, गौरैया और लाल बासमती की घटती संख्या पर चिंता
देहरादून: बच्चों ने हरेला अभियान में क्लाइमेट चेंज के प्रति जागरूकता बढ़ाई, गौरैया और लाल बासमती की घटती संख्या पर चिंता

देहरादून: बच्चों ने हरेला अभियान में क्लाइमेट चेंज के प्रति जागरूकता बढ़ाई

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कम शब्दों में कहें तो, हाल ही में देहरादून में “क्लाइमेट चेंज-बच्चों की नजर से” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बच्चों ने अपने आसपास के परिवेश पर विचार साझा किए और बताया कि गौरैया जैसी पक्षियों की संख्या में कमी और लाल बासमती चावल की अदृश्यता बढ़ती जा रही है।

धाद के हरेला अभियान के अंतर्गत दून लाइब्रेरी एवं रिसर्च सेंटर में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। बच्चों ने अपने घर, आस-पड़ोस तथा स्थानीय परिवेश में विविध माध्यमों के माध्यम से पर्यावरण के संबंध में खोजबीन की। इस अवसर पर, हिमांशु आहूजा ने बताया कि धाद का हरेला अभियान अब अपने सोलहवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, और यह अभियान पौधारोपण, जनसंपर्क एवं हरेला विमर्श जैसे तरीकों से समाज में पर्यावरण की जागरूकता फैला रहा है।

बच्चों की नजर से पर्यावरण परिवर्तन

कार्यक्रम का संचालन आशा डोभाल ने किया। छात्रा अंतरिक्षा प्रताप सिंह ने बताया कि किस प्रकार जुगनू, केंचुआ और कम्बल कीड़े जैसे सूक्ष्म जीव हमारे पर्यावरण के लिए अति आवश्यक हैं, लेकिन बदलते वातावरण के कारण उनकी संख्या में कमी आ रही है।

आमना खान ने कहा कि बेमौसमी बदलावों के कारण मच्छरों और मलेरिया जैसी बीमारियों में वृद्धि हो रही है, जिसमें गर्मी की बढ़ती हुई तीव्रता एक महत्वपूर्ण कारण है। दिव्यांशी काम्बोज ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि बढ़ता हुआ शहरीकरण और सौम्य पर्यावरणीय परिवर्तन लाल बासमती चावल की एक किस्म को देहरादून से गायब कर रहा है।

सदब ने यह भी बताया कि कौलगढ़ में पहले गौरैया बहुतायत में दिखाई देती थीं, लेकिन अब उनकी संख्या में भारी गिरावट आ रही है। इस प्रकार, स्थानीय बच्चों ने अपने अनुभवों के माध्यम से पर्यावरण की समस्या को उजागर किया।

कार्यक्रम की विशिष्टता

कार्यक्रम में हरबंस कपूर राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, कौलगढ़ से कुमारी सदब, सपना वर्मा और शहीद मेख बहादुर गुरुंग कैंट कन्या इंटर कॉलेज से दिव्यांशी काम्बोज, अंतरिक्षा प्रताप सिंह एवं आमना खान ने भाग लिया।

कार्यक्रम के समापन पर विचार साझा करते हुए भारत ज्ञान विज्ञान समिति के विजय भट्ट ने भी बच्चों की बातों का समर्थन किया। अंत में, धाद के उपाध्यक्ष गणेश चन्द्र उनियाल ने कार्यक्रम का समापन संबोधन दिया।

इस कार्यक्रम में डॉ एस एस खैरा, देवेन्द्र कांडपाल, तन्मय ममगाईं, गणेश उनियाल, आलोक सरीन, बी एस रावत, के नैथानी, महावीर रावत, प्रदीप डोभाल, अनिमेष गुप्ता, विजय भट्ट, नरेन्द्र सिंह रावत, कल्पना बहुगुणा, डॉ विद्या सिंह, नीना रावत, ममता डोभाल आदि उपस्थित रहे।

हम सभी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम बच्चों की आवाज सुनें और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहें। आने वाली पीढ़ी हमारे हाथों में है, और हमें उनकी बातों और चिंताओं को गम्भीरता से लेना चाहिए।

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सादर,
स्नेहा शर्मा
Team Haqiqat Kya Hai

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