खनन के बिना ई-रवन्ना खनिज सामग्री के उपयोग पर अत्यधिक जुर्माना लागू होगा

The post खनन-बिना ई-रवन्ना खनिज सामग्री के इस्तेमाल पर लगेगा जुर्माना appeared first on Avikal Uttarakhand. खनिज सामग्री की रॉयल्टी और ई-रवन्ना की जांच अनिवार्य, पहली बार तीन गुना अर्थदंड अविकल उत्तराखण्ड देहरादून। बिना ई रवन्ना के खनिज सामग्री पर अब जुर्माना देना होगा। उत्तराखंड में… The post खनन-बिना ई-रवन्ना खनिज सामग्री के इस्तेमाल पर लगेगा जुर्माना appeared first on Avikal Uttarakhand.

Oct 9, 2026 - 09:39
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खनन के बिना ई-रवन्ना खनिज सामग्री के उपयोग पर अत्यधिक जुर्माना लागू होगा
खनन के बिना ई-रवन्ना खनिज सामग्री के उपयोग पर अत्यधिक जुर्माना लागू होगा

खनन के बिना ई-रवन्ना खनिज सामग्री के उपयोग पर अत्यधिक जुर्माना लागू होगा

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने बिना ई-रवन्ना के खनिज सामग्री के उपयोग पर कठोर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसके तहत पहली बार खनिज सामग्री पर जुर्माना लगाया जाएगा। यह निर्णय राज्य के निर्माण कार्यों में पारदर्शिता एवं कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी निर्माण कार्यों में खनिज सामग्री की रॉयल्टी और ई-रवन्ना की जांच अब अनिवार्य कर दी गई है। यदि किसी परियोजना में बिना ई-रवन्ना के खनिज सामग्री का उपयोग किया जाता है, तो संबंधित उद्यम को जुर्माना भुगतना होगा। सरकार ने इस विषय में सख्त दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिनका पालन न करना अवैध खनन की श्रेणी में माना जाएगा।

सख्त दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य

सरकारी विभागों और कार्यदायी संस्थाओं को आदेश दिया गया है कि वे निर्माण स्थल पर पहुंचने वाली खनिज सामग्री के लिए वैध एमएम-11 या प्रपत्र-जे का प्रस्तुतीकरण अनिवार्य करें। यदि वैध दस्तावेज नहीं मिलते हैं, तो संबंधित खनिज को अवैध मानते हुए नियमानुसार अर्थदंड लगाया जाएगा। यह कदम खनिज की पारदर्शिता और वैधता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

निर्देशों के अनुसार, ठेकेदारों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली उपखनिज सामग्री के लिए केवल एमएम-11 या प्रपत्र-जे की द्वितीय प्रति स्वीकार की जाएगी। यदि खनिज सामग्री की आपूर्ति के दौरान वैध रवन्ना प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो इसे अवैध खनन एवं परिवहन माना जाएगा।

तीन गुना अर्थदंड का प्रावधान

उत्तराखंड खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण का निवारण) नियमावली-2021, संशोधित 2024 के नियम-14 के तहत पहली बार खनिज की रॉयल्टी का तीन गुना जुर्माना लगाने का प्रावधान है। यह जुर्माना पहली बार में रॉयल्टी का तीन गुना होगा और उसके बाद यह चार गुना तक जा सकता है। ऐसे मामलों में सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़ी संस्थाओं को खनन विभाग को जानकारी देनी होगी।

इन निर्देशों के अनुसार, संबंधित अर्थदंड की राशि को रोका जाएगा और ठेकेदार के देयक का भुगतान उसी से किया जाएगा। खनन विभाग के द्वारा मामला निस्तारित किए जाने के बाद निर्धारित अर्थदंड की वसूली रोकी गई धनराशि से की जाएगी।

क्यूआर कोड के जरिए रवन्ना का सत्यापन

खनिजों के परिवहन के लिए विभागीय ई-रवन्ना पोर्टल से जारी विशेष सुरक्षा सुविधाओं वाले एमएम-11 और प्रपत्र-जे का सत्यापन अनिवार्य होगा। सरकारी विभागों को रवन्ना पर अंकित क्यूआर कोड को स्कैन करके उसकी वैधता की जांच करनी होगी। इस तरह से सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी खनिज सामग्री का प्रयोग सही तरीके से और कानूनी रूप से हो रहा है।

इसके साथ ही, उत्तराखंड राज्य खनिज अन्वेषण न्यास नियमावली-2025 के नियम-8 के उपनियम-3 के तहत संबंधित विभागों को रॉयल्टी का 5 प्रतिशत निर्धारित खाते में जमा कराना होगा। सरकार ने आदेश दिया है कि यह राशि नियमावली लागू होने के बाद और 10 सितंबर 2026 से पहले संबंधित प्रावधानों के तहत आईएफएमएस के माध्यम से जमा कराई जाएगी।

निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता

उत्तराखंड के सचिव बी के संत ने सभी संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं को इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की बात कही है। यह कदम खनिज संसाधनों के उचित उपयोग और उनका सही दस्तावेज बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। खनिज संसाधनों का उचित प्रबंधन राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभकारी होगा।

इस नई नीति के माध्यम से सूबे में अवैध खनन और संबंधित गतिविधियों पर कड़ा अंकुश लगाने की उम्मीद है। इससे न केवल खनिज सामग्री की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि विकास कार्यों में भी पारदर्शिता आएगी।

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Team Haqiqat Kya Hai, लेखिका: नीरू सिंह

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